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कोरोना कहर : तीसरी लहर व ओमीक्रॉन प्रभाव के मद्देनजर जैन समाज ने कसी कमर


जैन संवेदना ट्रस्ट व जैन समाज के

विभिन्न संगठनों ने लिया निर्णय

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शादी-ब्याह सीमित संख्या में होंगे

परिजनों की ही उपस्थिति में संपन्न

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अन्य बड़े धार्मिक-सामाजिक

समारोहों में भी सादगी होगी

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  • रायपुर/एक्ट इंडिया न्यूज
  • वैश्विक महामारी कोरोना आपदा की तीसरी लहर ओमीक्रॉन एम्पेक्ट के मद्देनजर जैन समाज ने अब एक बार फिर कमर कस ली है। समाज ने एकजुट हो सभी से यह अपील की है कि शादी-ब्याह सीमित संख्या में केवल परिजनों की ही उपस्थिति में कराए जाएं। साथ ही अन्य बड़े धार्मिक-सामाजिक समारोहों में भी सादगी बरती जाए।
  • पिछले दो-ढाई वर्षों में कोरोना संक्रमण ने सामाजिक जनजीवन को बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया। इससे जन-धन की क्षति तो हुई ही, लोगों के मन पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ा। तन को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले मन का स्वस्थ होना जरूरी है. तन जब स्वस्थ हो तो ही व्यक्ति आरोग्य, सम्पदा व सुख-शांति हासिल कर पाता है। क्षतिग्रस्त जनजीवन को सुख-शांति व आरोग्य, सम्पदा की पटरी पर लौटाने सकल जैन समाज ने राज्य स्तर पर समाज के बीच वृहद संपर्क कर अपने समाज की एक गाइडलाइन तय की है।
  • इस गाइडलाइन का पालन कराने प्रमुख रूप से जैन संवेदना ट्रस्ट सहित छत्तीसगढ़ सकल जैन समाज और जैन समाज के विभिन्न संगठनों द्वारा आह्वान किया जा रहा है। जिसमें समाज के हर वर्ग से मौजूदा उत्पन्न परिस्थिति के अनुरूप जीवनशैली में बदलाव लाने की अपील की जा रही है।
  • जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर, विजय चोपड़ा ने कहा है कि बीता आपदा काल हमें बड़े सबक दे चुका है, अब हमें चैतन्य होकर अपनी परम्परागत जीवन शैली में परिस्थिति अनुरूप आंशिक बदलाव बहुत जरूरी है। महेन्द्र कोचर , विजय चोपड़ा ने सामाजिक जनजीवन को स्वस्थ-सुरक्षित बनाए रखने के लिए सामाजिक गाइडलाइन बनाने की जरूरत पर बल दिया है। समाज जनों ने आपस में विमर्श कर सामाजिक सरोकार के तहत एक सामाजिक गाइडलाइन तैयार की है। जिसका पालन करने की विनम्र अपील करते हुए कहा जा रहा है कि शासन के लॉकडाउन-अनलॉक की प्रक्रिया समाप्त होने और शासकीय गाइडलाइन की अनिवार्यता खत्म होने के बाद भी खतरा पूरी तरह टलते तक हमें अपनी गाइडलाइन को अपनाना चाहिए। ताकि शत-प्रतिशत अर्थात् 100 प्रतिशत साक्षर हमारा यह जैन समाज इसआपदा में अन्य समाजों के लिए एक आदर्श उदाहरण बना रहे।

यह है सामाजिक गाइडलाइन

  • जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने बताया कि सभी संगठन प्रमुखों से विमर्श कर बनाई गई सामाजिक गाइडलाइन के तहत जनजीवन की बेहतरी के लिए अनेक प्रभावी निर्णय लिए गए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से…….

  • 1. शादी-विवाह सीमित संख्या में परिजनों की उपस्थिति में संपन्न होंगे।

  • 2. सामूहिक धार्मिक-सामाजिक व अन्य समारोहों में भी सादगी होगी।

  • 3. अंत्येष्टि, शांति मिलन, उठावना भी परिजनों के मध्य ही होगा। शोक-बैठक इत्यादि नही कर संवेदना केवल संचार माध्यमों से ही दी जाए।

  • 4. जैन समाज के दुकानदारों से आवश्यक सावधानी बरतने की अपील।

  • 5. जैन समाज ऐसा कोई भी आयोजन नही करें जिससे कोरोना फैले या भीड़ जुटे।

  • 6. पूर्व निर्धारित बड़े धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों को रद्द करने की अपील।

  • 7. देशभर में आयोजित होने वाले समारोह जैसे- दीक्षा महोत्सव, उपधान-मोक्षमाला, नवाणु यात्रा जैसे कार्यक्रमों को भी सीमित संख्या में या आवश्यक होने पर ही करने की अपील की गई है।

  • 8. पूर्व में समाज द्वारा संचालित जैन आक्सीजन सिलेण्डर व कॉन्संट्रेटर सेंटर एवं कोविड सेंटर्स को पुन: शुरू करने हेतु आवश्यक तैयारी प्रारंभ।

  • 9. जन्म दिवस, मैरिज एनिवर्सरी जैसे कार्यक्रम केवल घरों तक सीमित होंगे। बधाई संदेश संचार माध्यमों से देकर अपनी सहभागिता-सद्भावना दर्ज कराएं। धार्मिक अनुष्ठान भी केवल घर-घर में ही हों, सार्वजनिक रूप से आयोजन न किया जाए।

  • 10. सौ प्रतिशत साक्षर समाज इस आपदा में अन्य समाजों के लिए उदाहरण बने ऐसे प्रयास हों।

  • समाज की इस निर्धारित गाइडलाइन को महेन्द्र कोचर विजय चोपड़ा, वीरेन्द्र डागा, महावीर कोचर, गुलाब दस्सानी पार्श्व भक्त मण्डल, गुरुदेव सेवा समिति, जैन महिला मण्डल, जिनकुशल संघ, शांतिनाथ मंदिर संघ ने जारी करते हुए समाज के गणमान्य व प्रमुखजनों से इसका पालन कराने के लिए सहयोग का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि सामाजिक गाइडलाइन हमारे परिवारों व समाज की सुरक्षा और बेहतरी के लिए बनाई गई है. जिसके तहत लिए गए निर्णय मूल रूप में समाज की सामूहिक अपील है. समाजहित की इस अपील को अपने निजी जीवन में कड़े नियम के तौर पर लिया जाए. साथ ही यह भी कहा गया कि इस सामाजिक गाइडलाइन का पालन शासकीय गाइडलाइन के निष्प्रभावी होने के बाद भी जब तक आपदा का संकट पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक किया जाता रहे।

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