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स्वास्थ्य

स्वास्थ्य जगत : मानव शरीर से हमेशा कैसे चिपके होते हैं अनगिनत फंगस

  • भारत में कोविड-19 महामारी ने कहर तो ढा ही रखा है, अब ब्लैक फंगस नाम की बीमारी ने भी ऐसे पैर पासरे हैं जिससे एक के बाद एक देश के कई राज्य उसे महामारी घोषित करने पर मजबूर हो रहे हैं, फफूंद जैसे जीव हमारे आसपास बहुत बड़ी विविध संख्या में मौजूद होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इंसानी शरीर में भी अनगिनत फफूंद मौजूद होते हैं।
कई तरह के फफूंद
संक्रमण से जूझता है इंसान
  • हम इंसान पहले ही कई तरह के फफूंद संक्रमण से जूझते आ रहे हैं. एथलीट फुट, रिंगवॉर्म, डाइपर रैश, डैंडरफ यानि बालों में रूसी, वजाइनल यीस्ट संक्रमण ये सभी फफूंद द्वारा होते हैं. ये सूक्ष्मजीव केवल माइक्रोस्कोप के द्वारा देखे जा सकते हैं, ये हवा पानी मिट्टी के अलावा इंसानी शरीर में बहुत बड़ी तादात में पाए जाते हैं।
शरीर के 14 जगहों से लिए नमूने
  • एनआईएच के शोधकर्ताओं ने हमारे शरीर में रहने वाले फफूंदों की गणना की है, उन्होंने पाया है कि इंसानी जिस्म में बहुत अधिक विविधता वाले फफूंद रहते है। शोधकर्ताओं ने 10 प्रतिभागी इंसानों के सर से लेकर पांव तक 14 जगहों से नमूने लिए और उनका डीएनए विश्लेषण किया जिससे वे फफूंद की मौजूदगी के इलाकों को जान सकें। इसके लिए उन्होंने सिर के पीछे, नाक, पैर, ग्रोइन जैसे कई क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया, जहां फफूंद की बीमारी फैलने की संभावना ज्यादा होती है।
80 प्रकार के फफूंद
  • डीएनए सीक्वेंसिंग से शोधकर्ताओं ने फफूंद के 80 वंशों का खुलासा किया जो हमारे शरीर की सतह पर पाए जाते हैं. इनमें से मैलासीजिया वंश के फफूंद सबसे ज्यादा संख्या में होते हैं जो हमारे सिर और धड़ में पाए जाते हैं. हमारे हाथ में जहां बैक्टीरिया की भरमार होती है,वहां कुछ कम फफूंद मिलते हैं. .लेकिन पैरों में एड़ियों, पैरों के अंगूठों और ऊंगलियों के बीच के चमड़ी, उनके नाखून में फफूंदों के सबसे विविध रूप देखने को मिलते हैं इन 80 वंश के फफूंदो में सैकारोमिसिस नाम क खमीर भी होता है जिसे बियर या ब्रैड बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
पैरों के नाखून
  • पैर के अंगूठे के नाखून के संक्रमण को हटाना बहुत मुश्किल होता है. दिलचस्प बात है कि शोधकर्ताओं ने पाया कि पैर के नाखूनों में एक अलग ही तरह के फफूंद समूह पनपता है.इसमें से कुछ नाखून का रंग छीन लेते हैं तो कुछ नाखून तोड़ देते हैं. वहीं कुछ तो रोगाणु बैक्टीरिया और फफूंद के प्रवेश के लिए भूमिका बनाते हैं।
क्यों अहम है ये अध्ययन
  • इस पूरे अध्ययन से खुलासा हुआ है कि त्वचा एक बहुत सक्रिय और जटिल किस्म का पारिस्थितिकी तंत्र है जहां बैक्टीरिया, वायरस और फफूंद आपस में अनुक्रिया करते हैं. इनकी गणना से शोधकर्ताओं का यह जानने का मौका मिला के इन सूक्ष्मजीवों का नेटवर्क कैसे काम करता और वे हमारे लिए क्या क्या करते हैं. इसकी वजह यह है कि कुछ सूक्ष्मजीवी हमारी त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी होते हैं. जबकि कुछ बीमारी फैलाते हैं या उसकी नींव रखते हैं।
बीमारियों में फफूंद
  • हमारे शरीर की त्वचा के कई हिस्से फफूंदों का घर है.पिचले साल ही एनआईएच के सहयोग से हुए एक शोध में पाया गया था कि मानव आंत में बैक्टीरिया के साथ फफूंद की भी बड़ी मात्रा में मौजूदगी होती है. लगभग तीन करोड़ अमेरिकी फफूंद संक्रमण से पीड़ित होते हैं. इनमें से ज्यादातर त्वचा संबंधी समस्याएं है. लेकिन फेफड़ों का जानलेवा संक्रमण, मस्तिष्क ज्वर के संक्रमण भी फफूंद के पाए गए हैं।
  • इसके अलावा मुंह के संक्रमण की कुछ दवाओं के ऐसे साइड इफेक्ट देखे गए हैं जिनसे गुर्दे तक नाकाम हो गए हैं. सही दवा और इलाज के लिए फफूंद की बेहतर जानकारी बहुत जरूरी है. जीनोंम सीक्वेंसिंग के लिए इन सूक्ष्मजीवों की गणना स्वास्थ्य और बीमारियों के क्षेत्र में नए आयाम खोलने वाली है।
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