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सांसद सुनील सोनी ने सकल जैन समाज की मांग को संसद में उठाया

रायपुर/एन्टी करप्शन टाइम्स

  • रायपुर लोकसभा के सांसद सुनील सोनी ने कल संसद में जैन समाज की आवाज को बुलंद किया। उन्होंने केंद्रीय पर्यटन मंत्री से मांग की है कि समवेत शिखर जो कि झारखंड गिरिडीह में स्थित है, जैन समाज की आस्था का बड़ा केंद्र है, उसे पर्यटन सूची से बाहर रखा जाए तथा मांस मदिरा की बिक्री को प्रतिबंधित किया जाए। सांसद सुनील सोनी ने आगे कहा कि झारखंड सरकार ने राज्य के पर्यटन केंद्रों की नई सूची जारी करते हुए नया इको सेंसिटिव ज़ोन मास्टर प्लान घोषित करते हुए समवेत शिखर को पर्यटन केंद्र की सूची में शामिल किया है। सरकार के इस फैसले का विरोध हो रहा है और जैन समाज सहमत नही है। इसके बाद श्री सोनी ने संसद में जैन समाज की मांग को उठाते हुए समवेत शिखर तीर्थ की रक्षा के लिए संसद सत्र के दौरान अपनी भावनाओं से सदन को अवगत कराया।
  • पिछले दिनों जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों व सभी सांसदों को पत्र लिखकर यह मांग रखी थी, कि समवेत शिखर पारसनाथ पर्वत को संरक्षित तीर्थक्षेत्र घोषित किया जाय। क्योंकि शिखरजी या श्री शिखरजी या पारसनाथ पर्वत भारत के झारखंड राज्य के गिरिडीह ज़िले में छोटा नागपुर पठार पर स्थित एक पहाड़ी है जो विश्व का सबसे महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थल भी है। श्री सम्मेद शिखरजी’ के रूप में चर्चित इस पुण्य क्षेत्र में जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों (सर्वोच्च जैन गुरुओं) ने मोक्ष की प्राप्ति की। यहीं 23 वें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ ने भी निर्वाण प्राप्त किया था।1,350 मीटर (4,430 फ़ुट) ऊँचा यह पहाड़ झारखंड का सबसे ऊंचा स्थान भी है।
  • उक्त मांग के पीछे सकल जैन समाज की अवधारणा यह रही होगी कि अगर विश्व का सबसे महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थल को सामान्य पर्यटन स्थल बनाने से जनसामान्य का आवागमन बढ़ेगा, जिससे हिंसा, शराब, मांसाहार की प्रवृत्ति होने लगी है। यह पारस नाथ पहाड़ी जैन धर्म की आस्था स्थली है जैन धर्म का मूलमंत्र अहिंसा परमो धर्म है। जैन अनुयायी शुद्ध शाकाहारी होते हैं।

समवेत शिखर पर्वत को संरक्षित तीर्थ स्थल घोषित करने जैन संवेदना ट्रस्ट ने सरकार से की मॉग

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