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डॉलर को सीधी टक्कर देगा रुपया, क्या है इसे इंटरनेशनल करेंसी बनाने का प्लान

एन्टी करप्शन टाइम्स

  • आरबीआई (RBI) भारतीय रुपये की ताकत दुनियाभर में बढ़ाने का प्रयास कर रहा है. भारत चाहता है कि देश का अंतरराष्ट्रीय व्यापार किसी और करेंसी की बजाय रुपये में हो. इसके लिए कवायदें भी शुरू हो चुकी हैं. कई ऐसे देश हैं जो इसमें अपनी रुचि भी दिखा चुके हैं. ताजिकिस्तान, क्यूबा, लग्जमबर्ग और सूडान ऐसे ही कुछ देशों के नाम हैं. यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई के कारण रूस पर जब पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाया, तब भारत और रूस के बीच इसी माध्यम से ट्रेड हुआ. भारत ने कुल 12 वोस्तरों खातों को मंजूरी दी है. इनमें से 6 रूस के लिए थे.
  • रूस के अलावा श्रीलंका और मॉरीशस के लिए भी आरबीआई ने 6 वोस्तरो खातों को मंजूरी दी है. वोस्तरो खाते क्या होते हैं इसके बारे में हम आगे आपको बताएंगे. शुरुआत 2 सवालों से करते हैं. पहला ये है कि आखिर भारत कैसे रुपये को एक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में स्थापित करेगा और दूसरा कि इससे देश को फायदा क्या होगा.
  • क्या है प्लान

    भारत की योजना है कि उसका जिन देशों के साथ अधिक व्यापार है उनके साथ भारतीय रुपये और संबंधी देश की मुद्रा में व्यापार संबंध स्थापित किए जाएं. इसके अलावा भारत चाहता है कि ऐसे देशों के साथ रुपये में व्यापार किया जाए जिनके पास डॉलर की कमी है या वह डॉलर खर्च करने में सक्षम नहीं है. साथ ही वह देश जिन पर प्रतिबंध लगे हुए हैं लेकिन भारत के साथ उनका व्यापार चलता है, देश उनके साथ भी रुपये में व्यापार करने की योजना बना रहा है. मसलन रूस, मॉरीशस और श्रीलंका के साथ भारत के वोस्तरो खाते खुलना इसी एक झलक हैं. भारत यूएई और सऊदी अरब के साथ भी ऐसी योजना बनाने पर काम कर रहा है. भारत-यूएई के बीच रुपया-दिरहम और सऊदी के साथ रुपया-रियाल की व्यापार व्यवस्था कायम करने के लिए तेजी से काम कर रहा है.

  • क्या होगा इससे फायदा

    अगर भारत रुपये में अंतरराष्ट्रीय व्यापार करता है तो उसके लिए आयात सस्ता हो जाएगा, जैसा हमें रुस के साथ देखने को मिला. इसके साथ ही देश को निर्यात बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. भारत उन मुल्कों के साथ व्यापार कर सकेगा जिन पर आर्थिक प्रतिबंध लगे हैं. रुपये में व्यापार बढ़ने से भारत की विदेशी मुद्रा भंडार की जरूरत भी कम होगी और हमें डॉलर को बचाकर रखने के लिए जतन नहीं करने होंगे. विदेशी मुद्राओं में आए तेज उतार-चढ़ाव का देश के ट्रेड पर बहुत कम असर होगा. रुपये का अंतरराष्ट्रीयकरण होने से वह मजबूत होगा और भारतीय व्यापारियों को तोल-मोल की ताकत बढ़ेगी.

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