जगदलपुरछत्तीसगढ़

नए चेहरे व कुशल नेतृत्व की क्षमता रखने वाले इस प्रत्याशी को क्यों चाहती है वहां की जनता

विधानसभा चुनाव 2023

एक्ट इंडिया न्यूज के लिये

अरुण पाढ़ी की विशेष रिपोर्ट

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क्या कहते है यह

विधानसभा से जुड़े आंकड़े

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  • जगदलपुर 06 नवंबर 2023
  • चित्रकूट विधानसभा में मतदाताओं की संख्या 1 लाख 68 हजार 77 है, जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या ज्यादा है और कुल मतदान केंद्र 235 है, विधानसभा में जातिगत समीकरण  आदिवसियो के माड़ीया 70% मुरिया 20% और सामान्य वर्ग 10% है , 2018 के चुनाव तक विधानसभा के 50 से अधिक मतदान केंद्र संवेदनशील और अतिसंवेदनशील केंद्र में आते थे, लेकिन इस साल इस विधानसभा में संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों को पूरी तरह से शून्य घोषित कर दिया गया है।
  • बस्तर विधानसभा की तरह ही चित्रकोट विधानसभा में भी पेयजल की सबसे बड़ी समस्या है, पठार क्षेत्र होने की वजह से इस इलाके के सैकड़ों गांव पानी के लिए आज भी गर्मी के मौसम में झरिया के पानी पर ही निर्भर रहते हैं, पेयजल की समस्या से निजात नहीं मिल पाने की वजह से यहां के ग्रामीणों में काफी नाराजगी है, कई किलोमीटर पैदल चलकर ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी लाना पड़ता है, हालांकि कांग्रेस के विधायक यहां बोर कराने की बात तो कहते हैं लेकिन अभी भी पेयजल की समस्या जस की तस बनी हुई है।
  • ग्रामीणों का कहना है कि इस सीट पर प्रत्याशी जीत के बाद ग्रामीणों को पूछने तक नही आते, चुनाव में लोक लुभावन वादे तो करते है फिर पांच साल पूछने तक नही आते, चित्रकोट विधानसभा में ऐसे कई गांव है जो विकाश की राह की बाट जोह रहा है, समस्या जस की तस बनी हुई है, वादे बड़ी बड़ी है काम कुछ भी नही, इस कारण अब ग्रामीण बदल के रहीबो, अब नही साहिबो जैसे नारों की गूंज सुनाई पड़ रही है।
  • इसके अलावा चित्रकोट विधानसभा नक्सल मुक्त हो चुका है, लेकिन कई ग्रामीण अंचलों में आज भी यहां के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं, सड़क नहीं होने की वजह से कई बार ग्रामीणों को कावड़ में बोकर मरीजों को शहर तक लाना पड़ता है, सड़क, पुल पुलिया और खासकर गांव गांव में स्वास्थ्य केंद्र नहीं बनने की वजह से लंबे समय से यहां के वासी मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।
  • छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बस्तर संभाग में कुल 12 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें एक मात्र सामान्य सीट है, जबकि अन्य 11 सीट आदिवासियों के लिए आरक्षित है, इन आदिवासी सीटों में से एक बस्तर जिले का चित्रकोट विधानसभा संभाग के सबसे महत्वपूर्ण विधानसभा में से एक है, 2003 में यह विधानसभा केशलूर विधानसभा के नाम से जाना जाता था, लेकिन 2008 में इसे चित्रकोट विधानसभा किया गया, आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने की वजह से यहां के लोग वनोपज और खेती किसानी पर आश्रित हैं।
  • इस बार 2023 में इस सीट से भाजपा प्रत्याशी विनायक गोयल को मौका मिला है, विनायक गोयल इससे पहले सरपंच, जिला पंचायत सदस्य व अन्य कई पदों पर रह चुके है, विनायक जमीन से जुड़े कार्यकर्ता है इस क्षेत्र में इनकी काफी लोकप्रियता हासिल की है, इसी लोकप्रियता के कारण भाजपा ने इस बार विश्वास जताया है, नया चेहरा व कुशल नेतृत्व की क्षमता रखने वाले विनायक गोयल को चित्रकोट की जनता सर आंखों में बिठा रखा है, इसलिए वह अपने जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे है।

आइए हम बताते है चित्रकोट

विधान सभा की पिछला स्टोरी

  • हालांकि 2008 में  चित्रकूट विधानसभा तत्कालीन बीजेपी सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण विधानसभा सीट बन गया, क्योंकि यहां टाटा ने स्टील प्लांट की नींव रखी थी और इसके लिए सैकड़ों किसानों से उनकी जमीन भी अधिग्रहण कर ली गयी थी। कुछ किसानों को मुआवजा भी मिल गया, लेकिन समय बीतने के साथ साथ टाटा ने यहां किसी कारणवश स्टील प्लांट स्थापित नहीं किया, जिससे किसानों का जमीन अधिग्रहण होने की वजह से उनके जमीन में खेती किसानी करना भी मुश्किल हो गया, जिसके बाद 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने किसानों की जमीन वापसी का मुद्दा उठाया और कांग्रेस की सरकार बनने पर सभी प्रभावित किसानों की जमीन टाटा से वापस दिलाने का वादा किया पर किसानों को अब तक उनके जमीनों का पट्टा नही दिला पाई अब किसान सिर्फ अपना खेती कर सकते है, जमीन का मालिकाना हक उन्हें अब तक नही मिला इस कारण उस क्षेत्र की जनताओं में कांग्रेस नेताओं के प्रति रोष व्याप्त हैं।
  • चित्रकूट विधानसभा के अंतर्गत लोहंडीगुड़ा, बास्तानार और तोकापाल तीन विकासखंड है। इसी विधानसभा क्षेत्र में बस्तर के सांसद दीपक बैज का भी निवास है। वहीं पूरे देश में मिनी नियाग्रा के नाम से मशहूर चित्रकोट वाटरफॉल भी इसी विधानसभा क्षेत्र में स्थित है। पर्यटन के क्षेत्र में काफी अग्रणी है।

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