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दुनियादेशधर्म / ज्योतिष

व्रत उपवास में कुट्टू का आटा क्यों खाया जाता है – पं. प्रियाशरण त्रिपाठी

रायपुर/एन्टी करप्शन टाइम्स

  • नवरात्र में क्यों खाया जाता है कुट्टू का आटा, इसमें किस तरह के होते है विटामिन और प्रोटीन, किन चीजों से मिलकर बनता है कुट्टू का आटा, नवरात्र के दौरान इस आटे से क्या क्या चीजें बनाई जा सकती है, व्रत करने वालों के लिए क्यों जरूरी है कुट्टू का आटा, इसको लेकर एन्टी करप्शन टाइम्स के सवाल पर पं. प्रियाशरण त्रिपाठी ने बताया।
व्रत उपवास में कुट्टू का आटा क्यों खाया जाता है - पं. प्रियाशरण त्रिपाठी Pradakshina Consulting PVT LTD
  • कुट्टू को अंग्रेजी में Buckwheat कहा जाता है, लेकिन इसका किसी तरह के अनाज से कोई संबंध नहीं है क्योंकि गेहूं, अनाज और घास प्रजाति का पौधा है जबकि कुट्टूस बकव्हीट का लैटिन नाम फैगोपाइरम एस्कलूलेंट है और यह पोलीगोनेसिएइ परिवार का पौधा है। बकव्हीट पौधे से प्राप्त फल तिकोने आकार का होता है। पीसकर जो आटा तैयार किया जाता है, उसे बकव्हीट यानी कुट्टू का आटा कहा जाता है। बकव्हीट का पौधा ज्यादा बड़ा नहीं होता है। इसमें गुच्छों में फूल और फल आते हैं। भारत में यह बहुत कम जगहों पर उगाया जाता है। हिमालय के हिस्सों जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड और दक्षिण के नीलगिरी में जबकि नॉर्थ ईस्ट राज्यों में उगाया जाता है।
व्रत उपवास में कुट्टू का आटा क्यों खाया जाता है - पं. प्रियाशरण त्रिपाठी Pradakshina Consulting PVT LTD
  • इसे पंजाब में ओखला बोला जाता है। यह जंगली इलाकों में ही पाया जाता है। इसकी सबसे ज्‍यादा पैदावार रूस में होती है। उसके बाद चीन, यूक्रेन, फ्रांस और कई अन्‍य देश। भारत के करीब देखें तो सबसे ज्‍यादा भूटान के जंगली इलाकों में इसकी पैदावार है। यह एक जड़ीबूटी है, जिसे ब्‍लडप्रेशर, मधुमेह, आदि की दवाओं में इस्‍तेमाल किया जाता है।
  • भारत में इसका प्रयोग व्रत के दौरान खायी जाने वाली चीजों में ही होता है। कुटटू एक प्रकार का पौधा है, जिसकी बहुत सी नस्लें हैं, अधिकतर नस्लें जंगली हैं। कुट्टू पौधे के सफेद फूल से निकलने वाले बीज को पीस कर इसका आटा तैयार किया जाता है। जिसे आमतौर पर सभी लोग कुटटू का आटा बोलते हैं। इसे खासतौर पर व्रत में इसलिए इस्‍तेमाल किया जाता है, क्‍योंकि ना यह अनाज है और न ही वनस्पति। यह एक घास परिवार का सदस्य है।

दवाओं में भी होता इसका इस्‍तेमाल

  • वनस्‍पति विज्ञान के मुताबिक यह पॉलीगोनाइसी फैमिली का होता है। इसका वनस्‍पति नाम फागोपिरम एस्‍कुलेंटम होता है। अंग्रेजी में कुटटू को बकव्हीट कहते हैं। दवाओं में इस्‍तेमाल होने वाला कुट्टू अपने रासायनिक व्‍यवहार के कारण बदनाम है। डॉक्टारों के अनुसार कुटटू का आटा गरम होता है। इससे शरीर में कार्बोहाइड्रेट और ग्लूकोज का स्तर बढ़ता है। कुटटू में वसा अधिक होती है। इसका सावधानी से प्रयोग किया जाना चाहिए इसके आटे का प्रयोग अधिकतम एक माह तक उपयोग में लाया जा सकता है। जहां तक हो सके ताजा आटा ही प्रयोग करना चाहिए।

कितने दिनों के अन्दर होता है

उपयोग करने लायक

  • आटे में बैक्टीरिया और फंगस लग जाते हैं। कुटटू का आटा ज्यादा दिनों तक रखे होने की स्थिति में माइक्रोटाक्सिन का निर्माण हो जाता है, जोकि शरीर के लिए हानिकारक है। खराब कुटटू के आटे को खाने से उल्टी के साथ चक्कर आने लगते हैं। बेहोशी भी आ सकती है। शरीर ढीला पडऩे लगता है। डाक्टरों के अनुसार ज्यादा दिनों तक रखे कुटटू के आटे से बने पकवान खाने से लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार होते हैं।

कुटटू आटे से व्रत में खाने वाली

पूड़ियां, पराठे, पकौड़े, चीला

आदि बनाया जाता है

  • आटे में बैक्टीरिया और फंगस लग जाते हैं। कुटटू का आटा ज्यादा दिनों तक रखे होने की स्थिति में माइक्रोटाक्सिन का निर्माण हो जाता है, जोकि शरीर के लिए हानिकारक है। खराब कुटटू के आटे को खाने से उल्टी के साथ चक्कर आने लगते हैं। बेहोशी भी आ सकती है। शरीर ढीला पडऩे लगता है। डाक्टरों के अनुसार ज्यादा दिनों तक रखे कुटटू के आटे से बने पकवान खाने से लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार होते हैं। सही मायने में कुट्टू का आटा खाने से लोगों के अस्‍पताल तक पहुंचने के जिम्‍मेदार वो फैक्‍ट्री वाले हैं, जो खराब कुट्टू को पीसकर आटा बाजार में बेचते हैं। वे लोग जिम्‍मेदार हैं, जो ठीक से इस आटा की पैकेजिंग नहीं करते और नमीं के संपर्क में आने पर इस आटा में रासायनिक क्रियायें होती हैं और यह जहर बन जाता है।
  • कुट्टू का आटा प्रोटीन से भरपूर होता है। इसमें मैग्नीशियम, विटामिन-बी, आयरन, कैल्शियम, फॉलेट, जिंक, कॉपर, मैग्नीज और फासफोरस भरपूर मात्रा में होता है। इसमें फाइटोन्यूट्रिएंट रूटीन भी होता है जो कोलेस्ट्रोल और ब्लड प्रेशर को कम करता है। सेलियक रोग से पीड़ितों को भी इसे खाने की सलाह दी जाती है।

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